वृक्ष हों भले खड़े,हों घने हों बड़े,एक पत्र छाँह भी,माँग मत, माँग मत, माँग मत,अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ। तू न थकेगा कभी,तू न रुकेगा कभी,तू न…
मेरी कलम
गुजर जाएगा, गुजर जाएगामुश्किल बहुत है, मगर वक्त ही तो हैगुजर जाएगा, गुजर जाएगा जिंदा रहने का ये जो जज्बा हैफिर उभर आएगागुजर जाएगा, गुजर…
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलोसभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो इधर उधर कई मंज़िल हैं चल…
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,शर्त लेकिन थी कि ये…
एक राजा था. काफी बूढा हो चूका था. एल दिन उसने अपने मंत्री को बुलाया और कहा – “देखो, राजकुमार अभी छोटे हैं . जिद्दी…





